सरोवर में जल लेने गये युधिष्ठिर को उस सरोवर में रहनेवाले यक्ष ने चार प्रश्न किये, और कहा कि उन चार प्रश्नों के उत्तर देने पर हि वह सरोवर का जल ले सकते हैं । तब उन के बीच निम्न प्रश्नोत्तरी हुई;
श्रुति में अलग अलग कहा गया है; स्मृतियाँ भी भिन्न भिन्न कहती हैं; कोई एक ऐसा मुनि नहीं केवल जिनका वचन प्रमाण माना जा सके; (और) धर्म का तत्त्व तो गूढ है; इस लिए महापुरुष जिस मार्ग से गये हों, वही मार्ग लेना योग्य है ।
दिवसस्याष्टमे भागे शाकं पचति गेहिनी । अनृणी चाप्रवासी च स वारिचर मोदते ॥
हे जलचर ! दिन के आठवें भाग में (सुबह-शाम रसोई के वक्त) जिसकी गृहिणी खाना पकाती हो, जिसके सर पे कोई ऋण न हो, जिसे (अति) प्रवास न करना पडता हो, वह इन्सान (घर) आनंदित होता है ।
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