रजिस्ट्रेशन और लेखन मुद्रण ई-मेल

सुसंस्कृत की मुलाकात लेने के लिए धन्यवाद । आशा करते हैं, यहाँ पेश किये गये साहित्य-रत्न आपको हितकारी लगे । रजिस्ट्रेशन के जरीये आप इस छोटी सी सफर को निश्चित स्वरुप दे सकते हैं, और विशेष रुप से हमारे साथ सम्मिलित हो सकते हैं जैसे कि;

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 यदि आप इस वेब साइट पर सुभाषित इत्यादि पोस्ट करना चाहते हैं, तो कृपया निम्नलिखित मार्गदर्शिका ध्यान में लिजिए:

* यदि आप पहली बार यह कर रहे हैं, तो सबसे पहले “लॉग इन फॉर्म” द्वारा रजिस्टर किजिए, तथा आपको “लेखक” बनाने का निवेदन हमें “संपर्क करें” पर से भेजिए । एक-दो दिन के भीतर इस विषय में अनुमति दर्शक ई-मेल आप हम से पायेंगे ।

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* तकनीकी खराबी के कारण अगर आप वेब साइट में देवनागरी लिपि में टाइप नहीं कर पाते, तो कृपया वर्ड में टाइप किजिए, और वेब पेज पर आकर पेस्ट किजिए ।

* आपका विषय इडिटींग के बाद संबंधित विभाग में या मुख्य पृष्ठ पर प्रकट कर दिया जायेगा ।

* एक बार “लेखक” का स्तर पा लेने पर आप कभी
भी विषय पोस्ट कर सकते हैं । उपरोक्त मार्गदर्शिका पुनः दोहराने की जरुरत नहीं

आपके सहकार के लिए धन्यवाद ।

Comments (27)
  • UMESHGOKUL

    I want to written of Bhagwatpuran. Please give the guidance.

    Thanks

    Umesh Chandra Sharma
    Gokul-9997562555

  • shaileshmahuva  - subhasit

    su sanskrit ki tarha me subhasit likhta hu muje guidance de
    abhar
    shailesh pathak

  • Anwar  - परोपकार

    I want 5 sentences on परोपकार in Sanskrit. Can anyone please help?

  • hitesh18

    परोपकराय फलन्ति वृक्षा परोपकराय दुहन्ति गाव
    परोपकराय वहन्ति नद्या परोपकरार्थमिदं शरीरं

  • Champion  - Namaste

    Aap mujhe 2 din ka samay dijie ma aapko paropkar par 5 vakya la kar doonga :pirate:

  • vijayraj81  - Sanskrit Pranali

    I am having 3 month old Son.I want him to study Sanskrit along with todays Traditional Education.Can you please tell me how do i go ahead? Do you know any organisation in baroda,conducting part time sanskrit coaching?

    Appreciate your efforts.Together we can do better.

  • nvyaghresh

    Thanks

  • Mehul Pravinbhai Patel  - Thank you very much

    Thank you for thinking and implementing this wounderful website and articles inside.-
    Mehul

  • Shripad  - भगवद्गीता और संस्कृत इन दोनों का साथ साथ अभ्यास

    महोदय,
    भगवद्गीता और संस्कृत इन दोनों का साथ साथ अभ्यास करनेका जो उपक्रम मैंने हाथमे लिया है, उसमें बहुतों के योगदान मिले तो बहुत आभारी रहूँगा |
    आपके सदस्योंको http://study1geetaa2sanskrit.wordpress.com/ इस ब्लॉग पर चलते मेरे इस उपक्रम के बारेमें कृपया सूचित करें |
    मेरा दूसरा भी ब्लोग है http://slabhyankar.wordpress.com | इस ब्लॉग में मैंने संस्कृतके कई सुभाषितोंका अध्ययन पेश किया है | इस पर भी आपके सदस्य गौर करें तो आभारी रहूँगा |
    धन्यवाद !
    आपका स्नेहाभिलाषी
    श्रीपाद अभ्यंकर

  • Shripad  - Learning together Sanskrit and GeetA (Chapter 1 ve

    महोदय,
    भगवद्गीता और संस्कृत इन दोनों का साथ साथ अभ्यास करनेका जो उपक्रम मैंने हाथमे लिया है, उसमें Learning together Sanskrit and GeetA (Chapter 1 verses 26, 27+) - Post # 19
    अभी अभी बनाया है |
    वह http://study1geetaa2sanskrit.wordpress.com/ इस वेब-पेजपर पढनेके लिए उपलब्ध है |
    विद्वाज्जनोंकी टीका-टिप्पणियोंके लिए सविनय प्रार्थना करता हूँ |
    धन्यवाद !
    आपका स्नेहाभिलाषी
    श्रीपाद अभ्यंकर

  • solanki rajesh  - i want to learn sanskrit thru your mails can you f

    jai sri krsna,

    i want to learn sanskrit thru your mails can you favour me?

    you may pl. email me .

    ra_solanky@yahoo.com
    jr-finance-a3@iocl.co.in

  • hitesh18

    नमस्कार

    संस्कृत भाषा के प्रति आपका यह जो प्रयत्न है वो बहुत ही सराहनिय है।

    एक सुजाव है कि यह संस्कृत पाक्षिक मे पक्ष वाक्य मे जो शब्द दिये है उनके साथ उनके लिंग पु. स्त्री. नपु. आदि साथमे शब्द का अंत और मूल शब्द मिले तो धातुरूप पाठ के लिए सरल होगा।

    धन्यवाद
    हितेष कथिरिया
    सूरत, गुर्जरप्रदेश, भारतवर्ष
    ०९३७६२६३०६३

  • RADHE  - Kaliyuga Dharma

    Harer nam Harer nam Harer namaib kebalam |
    Kalau nastyeb nastyeb nastyeb Gatiranyatha | |

    Hare Krishna Hare Krishna Krishna Krishna Hare Hare |
    Hare Rama Hare Rama Rama Rama Hare Hare | |

  • RADHE

    त्रिनादपि सुनिचेन तरोरपि सहिश्न्नुना ।
    अमानिना मानदेय किर्तनियह सदा हरिह ॥

  • induarora

    kripya mujhe 5 sentence paropkaar ke bataye

  • makana

    kripya mujhe sanskrit me chira adharit prashna baatye :D

  • iamahunter  - kya baat.

    :x :no-comments: :ooo: :?: :( :0 ;)) :) :) :sleep: :0
    carry on...!! :D :angry: :angry-red: :idea:

  • sandeep  - paropkaar ...


    A line from ramcharitmanas.

    परहित सरिस धर्म नहिं भाई, पर पीड़ा सम नहिं अधमाई ||

    जिसका भावार्थ यह है की दूसरों का हित (भलाई) करने से बड़ा धर्म नहीं है और दूसरों को दुःख पहुंचाने के सामान कोई पाप नहीं है |

  • Ashish Gupta

    I want a Saskrit Esaay On Following-
    1.Paropkar
    2.Importance Of Sanskrit
    3.Kalidas
    About 2 Pages For Each and In Sanskrit.
    Please Email Me Before 03-09-2013(3rd September,2013)
    Its Urgent

  • चेतना

    निराकार, तत्त्वज्ञानी संपूर्ण परमेश्वरमेही समर्पित गुरुके शरीर जड आँखोसे कितनेही देखले मनुश्य पर सभी शरीरोमे तो क्या गुरु पुरे विश्वमे ब्रह्मांडमे एकही है ऐसे तत्त्ववेता संपूर्ण ज्ञानी सर्वज्ञ गुरुजो शरीर घारण करके सिर्फ और सिर्फ विश्वकल्याणके लियेही जिंदाहो ऐसे गुरुजी सदगुरुजीके चरणोमें मेरे कोटीकोटी प्रणाम,वंदन है| गुरुत्वाआकर्सण बलही तो पूरे विश्व चराचर का आधार है || गुरुपर ते नस सभिके शरीरके पेटके गुछ्छेमे एक नस है जिसे इश्वरकि नादि कहते है | श्वासोके द्वारा प्राणायम करके जगाया जायेतो मस्तिकके पिछेकी तरफ निचे ब्रम्हरंन्ध्र कहते वह खुल जाये तो स्वयंम गुरु बन जाते है जिन्हे हम आत्मगुरुभी कह शकते है जै जै गुरुदेव जै सदगुरुदेव | बाकी जो ना समझे तो उनके लिये यह भजन है ; अज्ञानी क्या फलको पावे, तेरी मेरी में जन्म गुमावे, हिरला हाथ फिर कहा से आवे, निकल गयो जब प्राण, प्रेम से हरि का गुण जो गावे, ज्ञानी होकर ध्यान लगावे, दास सत्य कहे वोही फल पावे, जो भजते है भगवान ||

  • चेतना  - श्वासों में बैठे ईश्वर के शहारे खुदको मस्तिकमें बै

    दीया तले अंधेरा जीसमे दीया शरीर है और अंधेरा वह है जो अपने अंदर ईश्वरकी ज्योतसे अंजान है। बडाही आश्चर्य लगता है उनको जब ये जानकारी मिलती है के जीस दीयेकी बात सतसंगमे हो रही है वह है शरीर के उपर ओर मस्तिक केभी उपर बिना बाटी और तेलके पहलेसेही जलती रहती है वह ज्योती ईश्वरके स्वयं प्रकाशकी जो अपनेही श्वासोमे छिपे ईश्वरकी बात हो रही है। पर थी खस अने श्वमां वश। परतंत्रता को छोडो और स्वतंत्र जो ईश्वर पहलेसेही है उसमे खुदको जोडो। बस यही है जीवन मुक्तिका मंत्र। आत्मासे परमात्माका सफर जो अनंत है।

  • Vishveshwar

    subhashut ke shlok kis granth me se liye gaye h jarur likhe.....

  • ASHWANI KUMAR DWIVEDI  - प्रश्न जिक्गयासा

    ह्यविघ्नकृत का संधि विच्छेद क्या होगा

  • Shankar

    सुंदर और सार्थक प्रयास के लिये आपका साधुवाद। आपके अथक प्रयासों से संस्कृत एवं हिंदी भाषा के प्रचार- प्रसार को नए आयाम मिलेंगे !

  • chandrakant patel

    I truly respect my culture.

  • किशन गोपाल मीना

    भारतीय संस्कृति सर्वोपरि

  • vimal

    मेरी संस्कृत रचना
    10/04/2016
    दोलन्ति पत्राणि शाखायुतानि।
    कम्पन्ति गात्राणि अतिजीर्णानि।
    ये अज्ञ जानन्ति नहिं सत्यपक्षं।
    मोदन्ति-क्रीडन्ति नवपल्लवानि।।

    @विमल कुमार शुक्ल'विमल'
    अयारी हरदोई

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