ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य मुद्रण
अर्जुन उवाच
ये शास्त्रविधिमुत्सृज्य यज्न्ते श्रद्धयान्विताः ।
तेषां निष्ठा तु का कृष्ण सत्त्वमाहो रजस्तमः ॥ १ ॥

हे कृष्ण ! जो मनुष्य (शास्त्रो के अज्ञान के कारण) शास्त्रविधि को त्यागकर श्रद्धा से युक्त देवादि का पूजन करते हैं, उनकी स्थिति फिर कोन सी है ? सात्त्विक अथवा राजसी किंवा तामसी ?