श्रीमद्भगवद्गीता
विधिहीनमसृष्टान्नं मुद्रण ई-मेल
विधिहीनमसृष्टान्नं मन्त्रहीनमदक्षिणम् ।
श्रद्धाविरहितं यज्ञं तामसं परिचक्षते ॥ १३ ॥

शास्त्रविधि से हीन, अन्नदान से रहित, बिना मन्त्रों के, बिना दक्षिणा के और बिना श्रद्धा के किये जानेवाले यज्ञ को तामस यज्ञ कहते हैं ।

 
देवद्बिजगुरुप्राज्ञपूजनं मुद्रण ई-मेल
देवद्बिजगुरुप्राज्ञपूजनं शौचमार्जवम् ।
ब्रह्मचर्यमहिंसा च शारीरं तप उच्यते ॥ १४ ॥

- देवता, ब्राह्मण, गुरु और ज्ञानीजनों का पूजन
- पवित्रता, सरलता, ब्रह्मचर्य और अहिंसा यह शरीर सम्बन्धी तप कहा जाता हैं ।

 
अनुद्बेगकरं वाकयं मुद्रण ई-मेल
अनुद्बेगकरं वाकयं सत्यं प्रियहितं च यत् ।
स्वाध्यायाभ्यसनं चैव वाङ् मयं तप उच्यते ॥ १५ ॥

जो भाषण उद्वेग न करनेवाला, प्रिय और हितकारक एवं यथार्थ भाषण है तथा जो वेद – शास्त्रों के पठन का एवं परमेश्वर के नाम – जप का अभ्यास है वही वाणी का तप कहा जाता है ॥ १५ ॥

 
मनःप्रसादः सौम्यत्वं मुद्रण ई-मेल
मनःप्रसादः सौम्यत्वं मौनमात्मविनिग्रहः ।
भावसंशुद्घिरित्येतत्तपो मानसमुच्यते ॥ १६ ॥

मन की प्रसन्नता, शान्तभाव, भगवच्चिन्तन करने का स्वभाव, मन का निग्रह और अन्तःकरण के भावों की भलीभाँति पवित्रता – यह मन सम्बन्धी तप कहा जाता है ।

 
श्रद्धया परया तप्तं मुद्रण ई-मेल
श्रद्धया परया तप्तं तपस्तत्त्रिविधं नरैः ।
अफलकाङ्क्षिभिर्युक्तैः सात्विकं परिचक्षते ॥ १७ ॥

फल की आकाङ्क्षा बिना परम श्रद्धा से किये हुए उस पूर्वोक्त तीन प्रकार के तप को सात्त्विक कहते हैं ।

 
सत्कारमानपूजार्थं मुद्रण ई-मेल
सत्कारमानपूजार्थं तपो दम्भेन चैव यत् ।
क्रियते तदिह प्रोक्तं राजसं चलमध्रुवम् ॥ १८ ॥

जो तप स्वार्थ (सत्कार, मान और पूजा के लिये) से या पाखण्ड से किया जाता है वह अनिश्चित एवं क्षणिक फलवाला तप यहाँ राजस कहा गया है ।

 
मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया मुद्रण ई-मेल
मूढग्राहेणात्मनो यत्पीडया क्रियते तपः ।
परस्योत्सादनार्थं वा तत्तामसमुदाहृतम् ॥ १९ ॥

जो तप मूढ़तापूर्वक हठसे, मन, वाणी और शरीर की पीड़ा के सहित या दूसरे का अनिष्ठ करने के लिये किया जाता है – वह तामस तप कहा गया है ।

 
दातव्यमिति यद्दानं मुद्रण ई-मेल
दातव्यमिति यद्दानं दीयतेऽनुपकारिणे ।
देशे काले च पात्रे च तद्दानं सात्विकं स्मृतम् ॥ २० ॥

दान देना कर्तव्य है – ऐसे भावसे देश काल और पात्र का विचार कर, उपकार न करने वाले के प्रति दान दिया जाता है, वह सात्विक कहा गया है ।

 
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