गुण
गुणी च गुणरागी मुद्रण ई-मेल

गुणी च गुणरागी च विरलः सरलो जनः ।
गुणवान हो, गुणानुरागी भी हो और सरल स्वभाव का भी हो एसा मानव मिलना दुर्लभ है ।

 
नमन्ति गुणिनो मुद्रण ई-मेल

नमन्ति गुणिनो जनाः ।
गुणी लोग विनम्र होते हैं ।

 
गुणवज्जनसंसर्गात् मुद्रण ई-मेल

गुणवज्जनसंसर्गात् याति स्वल्पोऽपि गौरवम् ।
गुणवान मानव के संसर्ग में आनेसे छोटा मानव भी गौरव प्राप्त करता है ।

 
गुणी गुणं वेत्ति मुद्रण ई-मेल

गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणः ।
गुणवान मानव गुण को समजता है, गुणहीन नहीं ।

 
गुणा गुणज्ञेषु मुद्रण ई-मेल

गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्ति ।
मनुष्य के गुण का गुणीजन में हि आदर होता है ।

 
गुणं पृच्छ्स्व मुद्रण ई-मेल

गुणं पृच्छ्स्व मा रूपम् ।
गुण को पूछो रुप को नहीं ।

 
गुणाः सर्वत्र पूज्यन्ते मुद्रण ई-मेल

गुणाः सर्वत्र पूज्यन्ते पितृवंशो निरर्थकः ।
गुण की हि सब जगह पूजा होती है, पितृवंश तो निरर्थक है

 
गुणैरुत्तुड्गतां याति मुद्रण ई-मेल

गुणैरुत्तुड्गतां याति नोच्चैरासनसंस्थितः ।
गुण की वजह से, नहीं कि उँचे आसन पर बैठकर आदमी उँचा बनता है ।

 
शरीरं क्षणविध्वंसि मुद्रण ई-मेल

शरीरं क्षणविध्वंसि कल्पान्तस्थायिनो गुणाः ।
शरीर एक क्षण में नष्ट होता है, लेकिन गुण कल्पान्त तक स्थायी रहते है ।

 
वसन्ति हि प्रेम्णि मुद्रण ई-मेल

वसन्ति हि प्रेम्णि गुणाः न वस्तुनि ।
गुण प्रेम में रहता है वस्तु में नहीं ।

 
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