आचार्य
ब्राह्मण - ब्राह्मणस्य अश्रुतं मुद्रण ई-मेल
ब्राह्मणस्य अश्रुतं मलम् ।
श्रुति का ज्ञान न होना ब्राह्मण का दोष है


 
ब्राह्मण - मन्त्रज्येष्ठा मुद्रण ई-मेल
मन्त्रज्येष्ठा द्विजातयः ।
वेदमंत्र के ज्ञान की वजह से ब्राह्मण श्रेष्ठ है ।

 
शिक्षक - यस्यागनः मुद्रण ई-मेल

यस्यागनः केवलजीविकायै
तं ज्ञानपण्यं वणिजं वदन्ति ।
जो विद्वान का ज्ञान केवल उपजीविका के लिए हो उसे ज्ञान बेचनेवाला व्यापारी कहते है ।

 
गुरु - गुरुशुश्रूषया मुद्रण ई-मेल
गुरुशुश्रूषया ज्ञानम् ।
गुरु की शुश्रूषा करनेसे ज्ञान प्राप्त होता है ।

 
गुरु - आज्ञा गुरुणां मुद्रण ई-मेल
आज्ञा गुरुणां ह्यविचारणीया ।
गुरु की आज्ञा अविचारणीय होती है ।

 
गुरु - ब्रूयुः स्निग्धस्य मुद्रण ई-मेल
ब्रूयुः स्निग्धस्य शिष्यस्य गुरवो गुह्यमप्युत ।
स्नेहपात्र शिष्य को गुरु गोपनीय ज्ञान भी बताते हैं ।

 
गुरु - तीर्थानां मुद्रण ई-मेल
तीर्थानां गुरवस्तीर्थम् ।
गुरु तीर्थों के भी तीर्थ है ।

 
आचार्य देवो मुद्रण ई-मेल
आचार्य देवो भव ।
आचार्य को देवसमान मान ।

 
आचार्यवान् पुरुषो मुद्रण ई-मेल
आचार्यवान् पुरुषो वेद ।
जिसका आचार्य श्रेष्ठ है वह मानव हि ज्ञान प्राप्त करता है ।

 
आचार्यः कस्माद् मुद्रण ई-मेल
आचार्यः कस्माद् , आचारं ग्राह्यति ।
आचार्य को आचार्य किस लिए कहा जाता है ? क्यों कि वे अपने आचरण द्वारा आचार का शिक्षण देते हैं ।


 



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