दारिद्र्य
दैन्यान्मरणम मुद्रण ई-मेल

दैन्यान्मरणमुत्तमम् ।
दिन गिनकर जीने से मरना अच्छा

 
अहो दुःखमहो मुद्रण ई-मेल

हो दुःखमहो दुःखमहो दुःखं दरिद्रता ।
दरिद्रता सब से बडा दुःख है ।

 
दरिद्रयमेकं गुण मुद्रण ई-मेल

दरिद्रयमेकं गुणराशिनाशि ।
एक दरिद्रता गुणों की राशि का नाश करती है ।

 
सर्वशून्या मुद्रण ई-मेल

सर्वशून्या दरिद्रता ।
दरिद्रता सर्वशून्य है याने कि दरिद्रता आये तब मानव का सर्वस्व चला जाता है ।

 
सर्वं शून्यं मुद्रण ई-मेल

सर्वं शून्यं दरिद्रता ।
दरिद्र के लिए सब शून्य है ।

 
उत्पद्यन्ते विलीयन्ते मुद्रण ई-मेल

उत्पद्यन्ते विलीयन्ते दरिद्राणां मनोरथाः ।
दरिद्र मानव की इच्छाएँ मन में उठती हैं और मनमें हि विलीन हो जाती हैं (यानी कि पूरी नहीं होती) ।

 
मित्राण्यमित्रतां यान्ति मुद्रण ई-मेल

मित्राण्यमित्रतां यान्ति यस्य न स्युः कपर्दकाः ।
जिसके पास धन न हो उसके मित्र भी अमित्र बन जाते हैं ।

 
धनहीनः स्वपत्न्यापि मुद्रण ई-मेल

धनहीनः स्वपत्न्यापि त्यज्यते किं पुनः परेः ।
धनहीन मानव का उसकी पत्नी भी त्याग करती है तो फ़िर दूसरों की क्या बात ?

 
मृतो दरिद्रः मुद्रण ई-मेल

मृतो दरिद्रः पुरुषः ।
दरिद्र मानव मुर्दे जैसा होता है ।

 
विशेषं नाधिगच्छामि मुद्रण ई-मेल

विशेषं नाधिगच्छामि पतितस्याधनस्य च ।
पतित और दरिद्र में कोई भेद नहीं है एसा मैं समझता हूँ ।

 
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