लोक स्वभाव
विषमां हि गतिं मुद्रण ई-मेल

विषमां हि गतिं प्राप्य दैवं गर्हयते नरः ।
विषम गति को प्राप्त होते मानव अपने “नसीब” की निंदा करते हैं ।

 
ज्ञात्वापि दोषमेव मुद्रण ई-मेल

ज्ञात्वापि दोषमेव करोति लोकः ।
दोष को जानकर भी लोग दोष हि करते हैं ।

 
सर्वो हि मन्यते लोक मुद्रण ई-मेल

सर्वो हि मन्यते लोक आत्मानं निरूपद्रवम् ।
सभी लोग अपने आप को अच्छे समझते हैं ।

 
गतानुगतिको लोकः मुद्रण ई-मेल

गतानुगतिको लोकः न लोक़ः पारमार्थिकः ।
लोग देख-देखकर काम करते हैं, वास्तविकता की जाँच नहीं करते ।

 
को लोकमाराधयितुं मुद्रण ई-मेल

को लोकमाराधयितुं समर्थः ।
सभी को कौन खुश कर सकता है ?

 
चिरनिरूपणीयो हि मुद्रण ई-मेल

चिरनिरूपणीयो हि व्यक्तिस्वभावः ।
व्यक्ति का स्वभाव बहुत समय के बाद पहचाना जाता है ।

 
अनपेक्ष्य गुणागुणौ जनः मुद्रण ई-मेल

अनपेक्ष्य गुणागुणौ जनः स्वरूचिं निश्र्चयतोऽनुधावति।
लोग गुण और अवगुण को ध्यान में लिए बिना अपनी रुचि से काम करतते हैं ।

 



[+]
  • Increase font size
  • Default font size
  • Decrease font size
 Type in