ऋते ज्ञानात् न मुक्तिः ।ज्ञान बिना मुक्ति नहीं है ।
यस्यागमः केवलजीविकायैतं ज्ञानपण्यं वणिजं वदन्ति ।
जिसका शास्त्राध्ययन केवल जीविका के लिए है वह विद्वान को ज्ञान बेचनेवाला व्यापारी कहते है ।
ज्ञानमार्गे ह्यहंकारः परिधो दुरतिक्रमः ।ज्ञान के मार्ग में अहंकार जबरदस्त रुकावट है ।
श्रध्दावान् लभते ज्ञानम् ।श्रध्दावान मानव ज्ञान प्राप्त करता है ।
न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते ।इस दुनिया में ज्ञान से अधिक पवित्र कोई चीज़ नहीं है ।
तद्विध्दि प्रणीपातेन परेप्रश्र्नेन सेवया ।विनम्रता, प्रश्र्न और सेवा करके उस ज्ञान को प्राप्त करो ।
श्रेयान् द्रव्यमयात् यज्ञात् ज्ञानयज्ञः परंतपः ।हे परंतप ! द्रव्ययज्ञ से ज्ञानयज्ञ श्रेष्ठ है ।
ज्ञाने तिष्ठन्न बिभेतीह मृत्योः ।ज्ञान में अवस्थित होने से मानव मृत्यु से नहीं डरता ।
ज्ञानस्यान्तो न विद्यते ।ज्ञान का अंत नहीं है ।
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