मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना ।इन्सान इन्सान की मति भिन्न होती है ।
मतिरेव बलाद् गरीयसी ।बल से अधिक बुद्धि हि श्रेष्ठ है ।
चलत्येकेन पादेन तिष्ठत्यन्येन बुध्धिमान् ।बुध्धिमान एक पैर से चलता है और दूसरे पैर से खडा रहता है याने कि सोचकर कदम बढाता है ।
बुद्धे र्फ़लमनाग्रहः ।आग्रह न रखना यह बुद्धि का फ़ल है ।
बुद्धिर्यस्य बलं तस्य ।जिसके पास बुद्धि है उसके पास बल है ।
विवेकानुसारेण हि बुध्दयो मधु निस्यन्दंते ।बुद्धि विवेकानुसार मध (फ़ल) देती है ।
बुद्धिः ज्ञानेन शुध्यति ।बुद्धि ज्ञान से शुद्ध होती है ।
यतो बुद्धिः ततः शान्तिः ।जहाँ बुद्धि है वहाँ शांति है ।
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कूट शब्द
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