Skip to content
Skip to main navigation
Skip to 1st column
Skip to 2nd column
SuSanskrit
मुख्य पृष्ठ
आशय
चिंतन
सुभाषित
संस्कृत
बाल सुरभि
सूक्तियां
विशेष
वेब संसाधन
आशा
गुर्वपि विरहदुःखम
गुर्वपि विरहदुःखमाशाबन्ध साहयति।
पुनः मिलने की आशा भारी विरह को झेलने की शक्ति देती है ।
Write comment (0 Comments)
जीविताशा धनाशा च
जीविताशा धनाशा च जीर्यतोऽपि न जीर्यति ।
आदमी वृध्द होता है लेकिन उसकी जीने की और धन की आशा वृद्ध नहीं होती ।
Write comment (0 Comments)
आशवधिं को गतः
आशवधिं को गतः ।
आशा का पार कौन कर पाया है ?
Write comment (0 Comments)
धनाशा जीविताशा च
धनाशा जीविताशा च गुर्वी प्राणभृतां सदा ।
प्राणीयों को धन की, और जीने की बहुत आशा होती है ।
Write comment (0 Comments)
आशया ये कृता दासास्ते
आशया ये कृता दासास्ते दासाः सर्वदेहिनाम् ।
आशा ने जिस को दास बनाया है वह सर्व लोगों को दास बनाता है ।
Write comment (0 Comments)
आशा बलवती ह्येषा
आशा बलवती ह्येषा न जहाति नरं कचित् ।
बलवान आशा मानव को कभी छोडकर नहीं जाती ।
Write comment (0 Comments)
आशां संश्रुत्य यो हन्ति
आशां संश्रुत्य यो हन्ति स लोके पुरुषाधमः ।
जो मानव दूसरे को आशा देकर उसका भंग करता है वह दुनिया में अधम पुरुष है ।
Write comment (0 Comments)
सूक्तियां
आलस्य
आपत्ति
अन्य सूक्तयः
अपयश
आशा
अतिथि
बुद्धि
दारिद्र्य
दुर्जन
गुण
ज्ञान
लोक स्वभाव
पण्डित
प्रेम
पुरुषार्थ
पुत्र
सज्जन
सुखदुःख
विद्या
आचार्य
लॉग इन
उपयोगकर्ता नाम
कूट शब्द
मुझे याद रखें
अपना कूट शब्द भूल गए?
अपना उपयोगकर्ता नाम भूल गए?
एक खाता बनाएँ
सदस्य मेनु
पोस्ट करें
रजिस्ट्रेशन और लेखन
पाक्षिक चिंतन
हिन्दी टाइपपॅड
सम्पर्क करें
[+]
Type in
--Indic Script--
Devnagari
English (F12)
Select Indian script from the list and type with 'The way you speak, the way you type' rule on this page. Refer to following image for details. Press F12 to toggle between Indic script and English.
Powered By
PramukhLib