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अरावप्युचितं कार्यम
अ
रावप्युचितं कार्यमातिथ्यं गृहमागते।
शत्रु भी घर आये तो उसका उचित आतिथ्य करना चाहिए ।
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सर्वस्याभ्यागतो
सर्वस्याभ्यागतो गुरुः ।
अभ्यागत व्यक्ति सब के लिए श्रेष्ठ होती है ।
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जीवितं याति साफ़ल्यं
जीवितं याति साफ़ल्यं स्वमभ्यागतपूजया ।
अभ्यागतका पूजन करने से मानव का खुद का जीवन सफ़ल बनता है ।
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देवादप्यधिकं पूज्यः
देवादप्यधिकं पूज्यः सतामभ्यागतो जनः ।
अभ्यागत व्यक्ति सज्जन पुरुषों के लिए देव से भी अधिक पूज्य होती है ।
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धन्यं यशस्यमायुष्यं
धन्यं यशस्यमायुष्यं स्वर्ग्यं च अतिथिपूजनम् ।
अतिथि का पूजन (सत्कार) धनवर्धक, यशवर्धक, आयुवर्धक और स्वर्गदेनेवाला होता है ।
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अतिथिदेवो भव
अतिथिदेवो भव ।
अतिथि को देव मान ।
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