पुरुषार्थ
उद्योगसम्पन्नं मुद्रण ई-मेल

उद्योगसम्पन्नं समुपैति लक्ष्मीः ।
उद्योग-संपन्न मानव के पास लक्ष्मी आती है ।

 
पुरुषकारेण विना मुद्रण ई-मेल

पुरुषकारेण विना दैवं न सिध्यसि ।
पुरुषार्थ बिना दैव सिद्ध नहीं होता ।

 
यत्ने कृते यदि न मुद्रण ई-मेल

यत्ने कृते यदि न सिध्यति कोऽत्र दोषः ।
यत्न करने के बावजुद यदि कार्य सिद्ध न हो तो उसमें मानव का क्या दोष ?

 

 
यत्नवान् सुखमेधते मुद्रण ई-मेल

यत्नवान् सुखमेधते ।
प्रयत्नशील मानव सुख पाता है ।

 
धिग् जन्म मुद्रण ई-मेल

धिग् जन्म यत्नरहितम् ।
प्रयत्नरहित जन्म को धिक्कार है ।

 
दैवं निहत्य कुरु मुद्रण ई-मेल

दैवं निहत्य कुरु पौरुषमात्मशक्त्या ।
दैव का विचार किये बगैर अपनी शक्ति अनुसार प्रयत्न करो ।

 
पुरुषकारमनुवर्तते मुद्रण ई-मेल

पुरुषकारमनुवर्तते दैवम् ।
दैव पौरुषका अनुसरण करता है ।

 
कृतं मे दक्षिणे मुद्रण ई-मेल

कृतं मे दक्षिणे हस्ते नयो मे सव्य आहितः ।

 



[+]
  • Increase font size
  • Default font size
  • Decrease font size
 Type in