नास्तिकः पिशुनश्चैव मुद्रण ई-मेल
नास्तिकः पिशुनश्चैव कृतघ्नो दीर्घदोषकः ।
चत्वारः कर्मचाण्डाला जन्मतश्चापि पञ्चमः ॥

नास्तिक, निर्दय, कृतघ्नी, दीर्घद्वेषी, और अधर्मजन्य संतति - ये पाँचों कर्मचांडाल हैं ।

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