स्वमस्तकमारूढं मृत्युं मुद्रण
स्वमस्तकमारूढं मृत्युं पश्येज्जनो यदि ।
आहारोऽपि न रोचते किमुतान्या विभूतयः ॥

यदि मानव अपने मस्तक पर सवार मृत्यु को देखें, तो उसको खाना भी नहीं रुचता, तो फिर दूसरों की संपत्ति का तो क्या पूछना ?