बलिनो मृत्युसिंहस्य मुद्रण ई-मेल
बलिनो मृत्युसिंहस्य संसारवनचारिणः ।
शृण्वन् व्याधिजरानादान् कथं तिष्डसि निर्भयः ॥

संसाररुप वन में घूमते, बलवान मृत्युरुप सिंह की व्याधि- जरा रुप गर्जनाएँ सुनकर भी, अब तक तू निर्भय कैसे खडा है ?

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