यथा व्यालगलस्थोऽपि भेको मुद्रण ई-मेल
यथा व्यालगलस्थोऽपि भेको दर्शानपेक्षते ।
तथा कालहिना ग्रस्तो लोको भोगानशाश्वतान् ॥

जैसे साँप के मुख में रहा रहा मेण्डक धाव की अपेक्षा रखता है, वैसे कालरुप सर्प से ग्रस्त मानव, अशाश्वत भोग इच्छता है ।

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