इदमद्य करिष्यामि श्वः मुद्रण ई-मेल
इदमद्य करिष्यामि श्वः कर्तास्मि इति वादिनम् ।
कालो हरति संप्राप्तो नदीवेग इव द्रुमम् ॥

जैसे नदी का वेग पेड को ले जाता है, वैसे आ पहुँचा काल, "आज यह करूँगा, कल वह करूँगा" ऐसा बोलनेवाले को ले जाता है ।

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