किं श्रिया किं कामेन मुद्रण
किं श्रिया किं कामेन किमीहितैः ।
दिनैः कतिपयैरेव कालः सर्वं निकृन्तति ॥

लक्ष्मी, राज्य, कामना, ये सब किस काम के ? थोडे हि समय में काल सब फाड खायेगा !