तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण मुद्रण ई-मेल
तर्कविहीनो वैद्यः लक्षण हीनश्च पण्डितो लोके ।
भावविहीनो धर्मो नूनं हस्यन्ते त्रीण्यपि ॥

तर्कविहीन वैद्य, लक्षणविहीन पंडित, और भावरहित धर्म - ये अवश्य हि जगत में हाँसीपात्र बनते हैं ।

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