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चिन्ताज्वरो मनुष्याणां मुद्रण ई-मेल

चिन्ताज्वरो मनुष्याणां क्षुधां निद्रां बलं हरेत् ।
रूपमुत्साहबुध्दिं श्रीं जीवितं च न संशयः ॥

The fever of worry snatches away hunger, sleep, strength, beauty, enthusiasm, mind, wealth and life itself - there is no doubt.

"चिंता" स्वरुप ज्वर (बुखार) भूख, नींद, बल, सौंदर्य, उत्साह, बुद्धि, समृद्धि और स्वयं जीवन को भी हर लेता है ।

 
मत्तः प्रमत्तः उन्मत्तः मुद्रण ई-मेल
मत्तः प्रमत्तः उन्मत्तः श्रान्तः क्रुद्धः बुभुक्षितः ।
त्वरमाणश्च लुब्धश्च भीतः कामी च ते दश ॥

मद्य पीया हुआ, असावध, उन्मत्त, थका हुआ, क्रोधी, डरपोक, भूखा, त्वरित, लोभी, और विषयलंपट – ये दस धर्म को नहीं जानते (अर्थात् उनसे संबंध नहीं रखना चाहिए) ।

 
आयु र्वित्तं गृहच्छिद्रं मुद्रण ई-मेल
आयु र्वित्तं गृहच्छिद्रं मन्त्रमौषध मैथुने ।
दानं मानापमानौ च नव गोप्यानि कारयेत् ॥

आयुष्य, वित्त, गृहछिद्र, मंत्र, औषध, मैथुन, दान, मान, और अपमान – ये नौ बातें गुप्त रखनी चाहिए ।

 
उद्योगः कलहः कण्डू मुद्रण ई-मेल
उद्योगः कलहः कण्डू र्मद्यं द्यूतं च मैथुनम् ।
आहारो व्यसनं निद्रा सेवनात् विवर्धते ॥

उद्योग, कलह, खुजली, मद्य, मैथुन, आहार, व्यसन, द्यूत, और निद्रा, सेवन करने से बढते हैं ।

 
पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यामुरसा मुद्रण ई-मेल
पद्भ्यां कराभ्यां जानुभ्यामुरसा शिरस्तथा ।
मनसा वचसा दृष्टया प्रणामोऽष्टाङ्गमुच्यते ॥

हाथ, पैर, घूटने, छाती, मस्तक, मन, वचन, और दृष्टि इन आठ अंगों से किया हुआ प्रणाम अष्टांग नमस्कार कहा जाता है ।

 
रति र्हासश्च शोकश्च मुद्रण ई-मेल
रति र्हासश्च शोकश्च क्रोधोत्साहौ भयं तथा ।
जुगुप्सा विस्मयश्चेति स्थायीभावाः प्रकीर्तिताः ॥

रति, हास, शोक, उत्साह, क्रोध, भय, निंदा, विस्मय – ये आठ स्थायीभाव माने गये हैं ।

 
शृङ्गार हास्य करुणा मुद्रण ई-मेल
शृङ्गार हास्य करुणा रौद्र वीर भयानकाः ।
बीभत्साद्भुतं संज्ञौ चेत्यष्टौ नाट्ये रसाः स्मृताः ॥

शृंगार, हास्य, करुणा, रौद्र, वीर, भयानक, बीभत्स, और अद्भुत – ये आठ नाट्यरस हैं ।

 
गोभिर्विप्रैः च वेदैश्च सतीभिः मुद्रण ई-मेल
गोभिर्विप्रैः च वेदैश्च सतीभिः सत्यवादिभिः
अलुब्धै र्दानशीलैश्च सप्तभि र्धार्यते मही ॥

गाय, ब्राह्मण, वेद, सती स्त्री, सत्यवादी इन्सान, निर्लोभी, और दानी – इन सात की वजह से पृथ्वी टिकी हुई है ।

 
संपत्सरस्वती सत्यं स मुद्रण ई-मेल
संपत्सरस्वती सत्यं सन्तानं सदनुग्रहः ।
सत्ता सुकृत सम्भारः सकाराः सप्त दुर्लभाः ॥

संपत्ति, सरस्वती, सत्य, संतान, सज्जन कृपा, सत्ता, और सत्कृत्य की सामग्री – ये सात 'स' कार दुर्लभ हैं ।

 
आदित्यः सोमो भौमश्च मुद्रण ई-मेल
आदित्यः सोमो भौमश्च तथा बुध बृहस्पतिः ।
भार्गवः शनैश्चरश्चैव एते सप्त दिनाधिपाः ॥

सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, और शनि – ये सात सप्ताह के दिनों के क्रमशः अधिपति हैं ।

 
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