परैः प्रोक्ता गुणा यस्य मुद्रण
परैः प्रोक्ता गुणा यस्य
निर्गुणोऽपि गुणी भवेत् ।
इन्द्रोऽपि लघुतां याति
स्वयं प्रख्यापितैर्गुणैः ॥

जब दूसरी व्यक्ति द्वारा गुणानुवाद होता है, तब वह निर्गुण हो तो भी गुणी कहलाता है । पर स्वयं इन्द्र भी यदि अपने गुण गाने लगे, तो वह हीनता को प्राप्त करता है ।