यस्मिन् देशे न सन्मानो मुद्रण
यस्मिन् देशे न सन्मानो न प्रीति र्न च बान्धवाः ।
न च विद्यागमः कश्चित् न तत्र दिवसं वसेत् ॥

जिस देश में सन्मान नहीं, प्रीति नहीं, संबंधी नहीं, और जहाँ विद्या मिलना संभव न हो, वहाँ एक दिन भी नहीं ठहरना चाहिए ।