मर्कटस्य सुरापानं मुद्रण
मर्कटस्य सुरापानं तत्र वृश्चिकदंशनम् ।
तन्मध्ये भूतसंचारो यद्वा तद्वा भविष्यति ॥

बंदर ने शराब पी, उसे बिच्छु ने काटा, उपर से उस में भूत प्रविष्ट हुआ, फिर सर्वथा अनिष्ट ही होगा (होने में क्या शेष बचेगा ?) ।