मनो हि द्विविधं प्रोक्तं मुद्रण
मनो हि द्विविधं प्रोक्तं शुध्दं चाशुध्दमेव च ।
अशुध्दं कामसंकल्पं शुध्दं कामविवर्जितम् ॥

अशुध्द और शुध्द एसे दो प्रकार का मन कहा है, कामना और संकल्प वाला मन अशुध्द और कामना रहित हो वह शुध्द ।