दानं पूजा तपश्र्चौव मुद्रण ई-मेल
दानं पूजा तपश्र्चौव तीर्थसेवा श्रुतं तथा ।
सर्वमेव वृथा तस्य यस्य शुध्दं न मानसम् ॥

यदि आदमी का मन शुध्द न हो तो दान, पूजा, तीर्थ, सेवा, सुनना सब व्यर्थ है ।

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