अन्तश्र्चित्तं न चेत् शुध्दं मुद्रण
अन्तश्र्चित्तं न चेत् शुध्दं बहिः शौचे न शौचभाक् ।
सुपकमपि निम्बस्य फ़लं बीजे कटु स्फ़ुटम् ॥

अन्तःचित्त जो शुध्ध न हो तो बाह्य शौच से मानव पवित्र नहीं बनता । नींब का फ़ल पक्का हो तो भी उसका बीज कटु हि होता है ।