चंचलं हि मनः कृष्णं मुद्रण ई-मेल
चंचलं हि मनः कृष्णं प्रमाधि बलवद दृठम् ।
तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम् ॥

हे कृष्ण यह मन चंचल और बहोत ही चल बनानेवाला है । उसका निग्रह करना वायुकी तरह दुषकर है ।

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