लावण्यरहितं रुपं विद्यया मुद्रण ई-मेल
लावण्यरहितं रुपं विद्यया वर्जितं वपुः ।
जलत्यक्तं सरो भाति नैव धर्मो दयां विना ॥

लावण्यरहित रुप, विद्यारहित शरीर, जलरहित तालाब शोभा नहि देते । उसी प्रकार दयारहित धर्म भी शोभा नहि देता ।

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