न च विद्यासमो बन्धुः मुद्रण ई-मेल
न च विद्यासमो बन्धुः न च व्याधिसमो रिपुः ।
न चापत्यसमो स्नेहः न च धर्मो दयापरः ॥

विद्या जैसा बंधु नहि, व्याधि जैसा कोई शत्रु नहि, पुत्र जैसा स्नेह नहि, और दया से श्रेष्ठ कोई धर्म नहि ।

Comments (0)
Only registered users can write comments!
 

[+]
  • Increase font size
  • Default font size
  • Decrease font size
 Type in