धर्मो जीवदयातुल्यो न मुद्रण ई-मेल
धर्मो जीवदयातुल्यो न क्वापि जगतीतले ।
तस्मात् सर्वप्रयत्नेन कार्या जीवदयाऽङ्गिभिः ॥

इस दुनिया में जीवदया के तुल्य धर्म इतर कहीं भी नहि । अर्थात् आपने सर्व प्रयत्न द्वारा जीवदया करनी चाहिए ।

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