सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मुद्रण ई-मेल
सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च ।
वंशानुचरितं चैव पुराणं पञ्चलक्षणम् ॥

सर्ग (उत्पत्ति), प्रतिसर्ग (लय), पुनरुत्पत्ति, मन्वन्तर (अलग अलग मनु से शुरु होनेवाला काल), और वंशानुचरित (कथाएँ) ये पुराण के पाँच लक्षण हैं ।

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