ग्रन्थार्थस्य परिज्ञानं मुद्रण ई-मेल
ग्रन्थार्थस्य परिज्ञानं तात्पर्यार्थ निरुपणम् ।
आद्यन्तमध्य व्याख्यान शक्तिः शास्त्र विदो गुणाः ॥

ग्रंथ का संपूर्ण ज्ञान, तात्पर्य निरुपण करने की समज, और ग्रंथ के किसी भी भाग पर विवेचन करने की शक्ति – ये शास्त्रविद् के गुण है ।

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