शमो दमस्तपः शौचं मुद्रण ई-मेल
शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च ।
ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम् ॥

अन्तःकरण का निग्रह, इंद्रियों का दमन, तप, बाह्य- भीतर की शुद्धि, क्षमाभाव, ऋजुभाव, ज्ञान-विज्ञान में आस्था रखना और उन्हें प्रस्थापित करना - ये ब्राह्मण के स्वाभाविक कर्म है ।

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