देशाटनं पण्डित मित्रता च मुद्रण ई-मेल
देशाटनं पण्डित मित्रता च
वाराङ्गना राजसभा प्रवेशः ।
अनेकशास्त्रार्थ विलोकनं च
चातुर्य मूलानि भवन्ति पञ्च ॥

देशाटन, बुद्धिमान से मैत्री, वारांगना, राजसभा में प्रवेश, और शास्त्रों का परिशीलन – ये पाँच चतुराई के मूल है ।

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