ईश्वरः सर्वभूतानां मुद्रण ई-मेल
ईश्वरः सर्वभूतानां हृद्देशेऽर्जुन तिष्ठति ।
भ्रामयन्सर्वभूतानि यन्त्रारुढानि मायया ॥

हे अर्जुन ! ईश्वर सब प्राणियों के ह्रदय में विराजमान है । शरीररुप यंत्र पर आरुढ हुए सब प्राणियों को, अपनी माया के ज़रीये (हरेक के कर्मों के मुताबिक) वह घूमाता रहता है । 

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