यस्मात्क्षरमतीतोऽहम मुद्रण
यस्मात्क्षरमतीतोऽतोहमक्षरादपि चोत्तमः ।
अतोऽस्मि लोके वेदे च प्रथितः पुरुषोत्तमः ॥

मैं (ईश्वर) नाशवंत जड समुदाय (क्षेत्र) से सर्वथा भिन्न हूँ, और अविनाशी जीवात्मा से भी उत्तम हूँ; इस लिए लोगों में तथा वेदों में पुरुषोत्तम के नाम से प्रसिद्ध हूँ ।