नास्तिकास्त्रिविधाः प्रोक्ता मुद्रण ई-मेल
नास्तिकास्त्रिविधाः प्रोक्ता धर्मज्ञै स्तत्वदर्शिभिः ।
क्रियादुष्टो मनोदुष्टो वाग्दुष्ट स्तथैव च ॥

धर्मज्ञ और तत्त्वदर्शी कहते हैं कि नास्तिक तीन प्रकार के होते हैं; क्रिया से विकृत, मन से विकृत और वाणी से विकृत ।

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