अविक्रयं सत्यमनन्तमाद्यं मुद्रण
अविक्रयं सत्यमनन्तमाद्यं गुहाशयम् निष्फलमप्रतर्क्यम् ।
मनोऽग्रयानं वचसा निरुक्तं नमाम्यहं देवदरं वेरण्यं ॥

सर्व विकारों से रहित, सत्य स्वरुप, अनंत, आद्य, सर्वान्तर्यामी, उपाधिरहित, तर्कातीत, मन से भी वर्णनातीत, ऐसे सर्वश्रेष्ठ, सर्वोत्तम देवता को हम नमस्कार करते हैं ।