स्वयं महेशः श्वशुरो नगेशः मुद्रण
स्वयं महेशः श्वशुरो नगेशः
सखा धनेश स्तनयो गणेशः ।
तथापि भिक्षाटनमेव शम्भोः
बलीयसी केवलमीश्वरेच्छा ॥

स्वयं महेश है, ससुर पर्वतश्रेष्ठ है, कुबेर जैसा धनी उनका मित्र है, और पुत्र गणों का स्वामी है । फिर भी भगवान शंकर को भिक्षा के लिए भटकना पडता है ! सचमुच, ईश्वर की ईच्छा हि बलवान है ।