मूर्खो द्विजातिः स्थविरो गृहस्थः मुद्रण
मूर्खो द्विजातिः स्थविरो गृहस्थः
कामी दरिद्रो धनवांस्तपस्वी ।
वेश्या कुरूपा नृपतिः कदर्यो
लोके षडेतानि विडम्बितानि ॥

उच्च कुल में जन्मने के बावजुद जो मूर्ख रहा हो, वृद्ध होने के बावजुद घर में बैठा हो, निर्धन होने के बावजुद अनेक कामना करता हो, धनवान होते हुए भी कष्ट सहता हो, वेश्या कद्रुपी हो, राजा कंजुस हो – ये छे हास्यास्पद बनते हैं ।