यस्य कस्य तरोर्मूलं मुद्रण ई-मेल
यस्य कस्य तरोर्मूलं येन केनापि सेवितम् ।
यस्मै कस्मै प्रदातव्यं यद्वा तद्वा भविष्यति ॥

कोई एखाद वृक्ष का मूल किसी दूसरे से जा मिलाया; फिर उसे किसी व्यक्ति को दिया, तो सर्वथा अनिष्ट ही होगा (होने में क्या शेष बचेगा ?) ।

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