यो भूतेष्वभयं दद्यात् मुद्रण ई-मेल
यो भूतेष्वभयं दद्यात् भूतेभ्यस्तस्य नो भयम् ।
यादृग् वितीर्यते दानं तादृगासाद्यते फलम् ॥

जो प्राणियों को अभय देता है, उसे प्राणियों से भय नहीं रहेता । जैसा दान दिया जाता है, वैसा ही फल मिलता है ।

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