अभय
वरमेकस्य सत्वस्य दत्ता मुद्रण ई-मेल
वरमेकस्य सत्वस्य दत्ता ह्यभय दक्षिणा ।
न तु विप्रसहस्त्रेभ्यो गोसहस्र मलड्कतम् ॥

हजार विप्रों को, सजायी हुई हजारों गायों के मुकाबले केवल एखाद प्राणी को "अभय" दक्षिणा देना ज़ादा योग्य है ।

 
जीवानां रक्षणं श्रेष्ठं मुद्रण ई-मेल
जीवानां रक्षणं श्रेष्ठं जीवा जीवितकांक्षिणः ।
तस्मात्समस्त दानेभ्योऽभयदानं प्रशस्यते ॥

जीवों का रक्षण श्रेष्ठ है । जीव जीने की इच्छा रखनेवाले होते हैं, इस लिए सब दानों में अभयदान प्रशंसा-पात्र है ।

 
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