बोधितोऽपि बहु सूक्तिविस्तरैः मुद्रण
बोधितोऽपि बहु सूक्तिविस्तरैः
किं खलो जगति सज्जनो भवेत् ।
स्नापितोऽपि बहुशो नदीजलैः
गर्दभः किमु हयो भवेत् कचित् ॥

अच्छे वचनों के उपदेश देने से क्या इस दुनिया में दुष्ट मानव सज्जन हो जायेंगे ? नदी के पानी से बार बार स्नान कराने के बावजुद क्या गधा कभी घोडा बन पायेगा ?