अहमेव गुरुः सुदारुणानामिति मुद्रण ई-मेल
अहमेव गुरुः सुदारुणानामिति हालाहल मा स्म तात दृप्यः ।
ननु सन्ति भवादृशानि भूयो भुवनेस्मिन् वचनानि दुर्जनानाम् ॥

हे हलाहल (विष) ! मैं भय़ंकर में श्रेष्ठ हूँ एसा घमंड न करना । इस जगत में तुज से भी भयंकर दुर्जन के वचन है ।

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