विषधरतोऽप्यति विषमः मुद्रण ई-मेल
विषधरतोऽप्यति विषमः ख़लः इति न मृषा वदन्ति विद्वांसः ।
यदयं नकुलद्वेषी स कुलद्वेषी पुनः पिशुनः ॥

दुष्ट मानव सर्प से भी ज़ादा भयंकर है, एसा विद्वान सही कहते हैं । सर्प चाहे नकुल (नोयला) द्वेषी है, फिर भी कुलका द्वेष नहीं करते, लेकिन दुष्ट तो कुल का भी द्वेष करते हैं ।

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