रविरपि न दहति तादृग् यावत् मुद्रण
रविरपि न दहति तादृग् यावत् संदहति वालिका निकरः ।
अन्यस्माल्लब्धपदः नीचः प्रायेण दुःसहो भवति ॥

रेती के कण जितना जलाते हैं उतना सूर्य भी नही जलाता ! दूसरे के पास से उच्च पद पानेवाला नीच सदैव दुःसह्य होता है ।