दुर्जनः सुजनीकर्तु यत्नेनापि मुद्रण
दुर्जनः सुजनीकर्तु यत्नेनापि न शक्यते ।
संस्कारेणापि लशुनं कः सुगन्धीकरिष्यति ॥

दुर्जन को सज्जन बनाना शक्य नहीं है । संस्कार देने से लसून को कौन सुगंधित कर सकता है ?