लब्धानामपि वित्तानां मुद्रण
लब्धानामपि वित्तानां बोद्धव्यौ द्वावतिक्रमौ ।
अपात्रे प्रतिपत्तिश्च पात्रे चाप्रतिपादनम् ॥

वित्तवानों के हाथ से धन का दो तरीकों से दुरुपयोग होता है; कुपात्र को दान देकर, और सत्पात्र को न देकर ।